लाहिड़ी-श्रुति प्रामाणिक क्रियायोग
श्री शिवेन्दु लाहिड़ी को भारत की प्राचीन ऋषि-परम्परा (पिता से पुत्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी) के अनुसार मौलिक योग पद्धति की शिक्षा ग्रहण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस प्रकार श्री श्यामाचरण से ज्ञान एवम् अनुवांशिकी के रूप में प्रवाहित क्रियायोग पद्धति उनके पुत्र श्री तिनकौड़ी एवं पौत्र श्री सत्यचरण के माध्यम से श्री शिवेन्दु जी को वर्ष 1960 में विरासत के रूप में प्राप्त हुई जब इनके स्वर्गीय पिता श्री सत्यचरण लाहिड़ी ने ''सत्यलोक'' (डी-22/3, चौषट्टि घाट, वाराणसी-221001) स्थित पारिवारिक मंदिर में इन्हें क्रिया-योग की विधिवत् दीक्षा दी।
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